खबरें—खबरें





 लोकमत समाचार में मेरी लघुकथा छपी है —अपराध बोध। पर उसके साथ गोविंद शर्मा छपने से रह गया..



हरिभूमि रोहतक के झज्जर संस्करण (20-11-17)में प्रकाशित अपनी एक व्यंग्य रचना
''भ्रष्टाचार रहित दिवस''
सर, अगले महीने आपका जन्म दिवस है। हर नेता-महानेता का जन्मदिवस किसी खास दिवस के रूप में मनाने का रिवाज चल रहा है । इसलिये हमने सोचा है....
सोचा है? किससे पूछकर सोचा है?तुमने सोचने से पहले यह क्यों नहीं सोचा कि मेरे बारे में क्या सोचना है । फिर, तुम क्यों सोच रहे हो? क्या मुझे सोचना नहीं आता? तुमने यह कैसे सोच लिया कि इस बारे में मैंने अभी तक कुछ नहीं सोचा? जबकि सारी दुनिया तो यह सोचती है कि मैं सिर्फ अपने बारे में सोचता हूं.....।
सॉरी सर, हमारी सोच को दफा करिये। वैसे भी आदमी सरकारी होते ही सोच की बजाय, ‘सूचना’ में ही व्यस्त हो जाता है। सर, आपने जो सोचा है, उसे हमारी सोच बना दीजिए ताकि सबको सूचना भेजी जा सके।
सुनो, देश में भ्रष्टाचार की क्या स्थिति है?
सर, फुल बटा फुल है। इसके लिये रक्त, आक्सीजन, स्थान... किसी चीज की कमी नहीं है। वैसे आप किस नजरिये से जानना चाहते हैं? हमारा पक्ष, विपक्ष की बड़बड़ाहट या सच्चाई?
मैं चाहता हूं कि मेरा जन्मदिन भ्रष्टाचार रहित दिवस के रूप में मनाया जाये। इस दिन ऐसा हो कि.....
सर, उसकी आप फिक्र न करें। वर्षो से हम यही करते आये हैं। दिवस मनाने का कोई अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार है तो पता करलें, अपने से ज्यादा बड़ा उसका अधिकारी कोई नहीं होगा।
घोषणा हो गई कि महानेता जी का जन्मदिन भ्रष्टाचार रहित दिवस के रूप में मनाया जायेगा। एक बार तो नेता से लेकर अफसर तक सब हिल गये। सबसे ज्यादा आम आदमी । सोचा, यदि भ्रष्टाचार नहीं हुआ तो उसका जायज काम कैसे होगा? उसे आश्वस्त किया गया कि एक ही दिन की बात है। फिर दारूबंदी वाले उन दो चार दिनों में क्या शराब नहीं मिलती है? जिसके लिये आगे वाला दरवाजा बंद होता है, उसके लिये पिछला दरवाजा खुल जाता है। वही होने लगा ,जो होता रहा है। महानेता के समर्थक वाह-वाह रूपी और विपक्षी हाय-हाय वाली ताली पीटने लगे।
भ्रष्टाचार रहित दिवस के संपन्न होते ही महानेता ने रिपोर्ट तलब की। उन्हें बताया गया कि भ्रष्टाचार रहित दिवस सफलता से मनाया गया। कहीं से भ्रष्टाचार का कोई समाचार नहीं मिला। आपको बधाई देने के नाम पर बैनरों, विज्ञापनों के करोड़ों के घपले की जो बात सामने आई है, वह उस दिन से चौबीस घंटे पहले की है। किसी अधिकारी कर्मचारी ने रिश्वत नहीं ली। किसी का कोई काम भी नहीं किया। इससे विश्वास हो गया कि इन लोगो ने भ्रष्टाचार रहित कठोर व्रत किया है। सरकार ने भी लोगों से दो कदम आये रहकर काम किया है। कोई में मौखिक भ्रष्टाचार नहीं किया गया यानी सरकार की तरफ से न तो किसी नई योजना की घोषणा की गई और न ही किसी पूर्व घोषित योजना को पूरा करने का दावा किया गया तथा आपके विरोधियों द्वारा भी आपको अपशब्द नहीं कहे गये।
देश को भ्रष्टाचार रहित करने के लिये पूरे देश में जमा भ्रष्टाचार की करोड़ों शिकायतों को निपटारा किया गया अर्थात् उन्हें रद्द कर दिया गया। इस तरह नई आने वाली शिकायतों के लिये अब रखने के स्थान की कमी नहीं रहेगी।
भ्रष्टाचार रहित दिवस से उपलक्ष्य में यह भी हुआ कि भ्रष्टाचार के दोश में जेलों में बंद नेताओं को राहत दी गई। कुछ की जेल अवधि में कटौती की गई तो कुछ की पूरी तरह माफ करदी गई। ऐसा करते समय यह ध्यान रखा गया कि आपके लिये हानिकारक नेताओं को बाहर नहीं आने दिया।
एक नई बात भी हुई। इस दिन किसी भी नेता ने किसी दूसरे नेता पर भ्रष्टाचार का न तो नया आरोप लगया और न पुराना दुहराया। इस लिये कल कई चैनलों ने राजनीति से दूर रहकर केवल पुरानी फिल्में दिखाई। आज के अखबारों में कई-कई कालम खाली पड़े है। वहां सिर्फ इतना लिखा है- भ्रष्टाचार रहित दिवस की भेंट।

Rajasthan Patrika- 19-11-2017




HARI BHOOMI ROHTAK      - 17-11-2017

हरिभूमि रोहतक (17-11-2017) में प्रकाशित अपनी एक लघुकथा




hARIbHOOMI rOHTAK      - 06-11-2017

हरिभूमि में प्रकाशित अपनी एक लघुकथा खुशबू


राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित अपनी एक लघुकथा
Dainik Hari BHoomi-2-11-2017



 रोहतक के प्रकाशित दैनिक हरिभूमि में अपनी एक लघुकथा प्रकाशित हुई है— नई पढाई।



लोकमत समाचार (31-10-17) में प्रकाशित अपनी एक लघुकथा ''सर्वे''




हरिभूमि -24-10-2017

हरिभूमि में प्रकाशित अपनी एक लघुकथा



हरिभूमि रोहतक-16-10-2017
हरिभूमि रोहतक में प्रकाशित अपनी एक लघुकथा


हरिभूमि रोहतक- 09-10-2017

हरिभूमि रोहतक में प्रकाशित अपनी एक व्यंग्य रचना


दैनिक ट्रिब्यून चंडीगढ में प्रकाशित अपनी एक व्यंग्य रचना —20-9-2017


दैनिक ट्रिब्यून की रविवारीय पत्रिका 'लहरें' में प्रकाशित अपनी एक बालकथा-18-9-17


आज लोकमत समाचार (नागपुर) में अपनी लघुकथा-17-9-2017


आज राजस्थान पत्रिका जयपुर में लघुकथा ज्ञापन 17-9-17

दैनिक समाज्ञा- 13-09-2017

आज कोलकाता से प्रकाशित ''दैनिक समाज्ञा'' में अपनी तीन लघुकथाएं ।
धन्यवाद साहित्य प्रेमी, साहित्य संपादक श्री शिखर चंद जैन





आह! जिंदगी
अहा जिंदगी के 11जून 2017 के अंक में एक लघुकथा 'समानता' छपी थी। आज पता चला जब प्रति और चैक दोनों आये। धन्यवाद

HariBhoomi Rhotak -12-09-2017

हरिभूमि के रोहतक संस्करण में प्रकाशित अपनी एक लघुकथा 


HariBhoomi Rhotak -11-09-2017

हरिभूमि के रोहतक संस्करण में प्रकाशित अपनी व्यंग्य रचना





लोकमत समाचार नागपुर में प्रकाशित अपनी लघुकथा


समीक्षा पाक्षिक सूरतगढ टाइम्स-15-8-2017
डा.कृष्ण कुमार आशु (श्री गंगानगर) के संपादन में प्रकाशित त्रैमासिक 'सृजन कुंज' के महिला लेखन अंक की अपने द्वारा की गई समीक्षा पाक्षिक सूरतगढ टाइम्स में प्रकाशित हुई है....

HariBhoomi Rhotak -04-09-2017
हरिभूमि रोहतक में प्रकाशित अपनी एक लघुकथा


Jansandesh Times 28-8-2017 
                                        जनसंदेश टाइम्स (Lucknow City) में प्रकाशित अपनी एक व्यंग्य रचना
HariBhoomi Sirsa -08-09-2017


हरिभूमि (सिरसा) में प्रकाशित अपनी एक लघुकथा

Lokmat Samachar - 17-8-2017
लोकमत समाचार में प्रकाशित अपनी लघुकथा ''अज्ञानी''




HariBhoomi Rhotak -08-09-2017

हरिभूमि रोहतक (8-8-17) में प्रकाशित अपनी एक लघुकथा


Rajasthan Patrika - पत्रिका health (6-8-17)

राजस्थान पत्रिका की रविवा​रीय पत्रिका health (6-8-17) में प्रकाशित मेरी एक लघुकथा





Hari_Bhoomi- 31-7-2017

दैनिक हरिभूमि (झज्जर संस्करण 31.7.2017) में प्रकाशित अपनी एक व्यंग्य रचना


दैनिक ट्रिब्यून के रविवारीय प्रशिष्ट 'लहरें' (30.7.17) में प्रकाशित अपनी बालकथा 'रस्सी बोली मालिक कौन'

Rajasthan Patrika -30-7-2017

Dainik Bhaskar 28-7-2017




No comments:

Post a Comment